Monday, May 27, 2019

नेपाल में तीन धमाके, चार लोगों की मौत

नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुए तीन धमाकों में चार लोगों की मौत हो गई है और सात लोग घायल हो गए हैं.
नेपाल के स्थानीय टीवी चैनल के टीवी एक धमाका काठमांडू शहर में हुआ है और दो सीमा से लगे इलाके में.
नेपाली अख़बार हिमालयन टाइम्स ने पुलिस के हवाले से लिखा है कि धमाकों की वजह का अभी पता नहीं लग सका है.
पुलिस का कहना है धमाका "इंप्रोवाइज़्ड एक्सप्लोज़िव डिवाइस' से किया गया है.
सुरक्षाबलों ने दोनों जगहों की घेराबंदी कर दी है और पड़ताल जारी है.
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि धमाके की एक जगह पर एक माओवादी समूह से सम्बन्धित पर्चे मिले हैं.
ये वही माओवादी समूह है जिस पर काठमांडू में इस साल फ़रवरी में धमाके करने का शक़ है. इस धमाके में एक शख़्स की मौत हो गई थी.
हालांकि अब तक किसी समूह या शख़्स ने धमाकों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.
17 साल के छात्र गोविंद भंडारी ने समाचार एजेंसी रॉययटर्स को बताया, "मैंने ज़ोर की आवाज़ सुनी और फिर जिधर से आवाज़ आई उधर दौड़ा. मैंने देखा कि धमाके की वजह से घर की दीवारों में दरारें आ गई हैं."
साल 2006 में नेपाल में एक दशक तक चला गृहयुद्ध ख़त्म हो गया था और उसके बाद देश का माहौल अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा. इसके अगले ही साल यानी 2007 में पहले विद्रोही रहा समूह सत्ताधारी पार्टी में शामिल हो गया था.
हालांकि विद्रोही समूह के कई सदस्य ये कहकर अलग भी हो गए थे कि उनके नेताओं ने मूलभूत क्रांतिकारी विचारों से धोखा किया है.
नेपाल के विदेश नीतियों के जानकार और राजनेताओं ने पड़ोसी मुल्क भारत में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी की शानदार जीत पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है.
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देने वाले नेपाल के पहले नेताओं में से एक बने. यहां तक कि उन्होंने गुरुवार को नरेंद्र मोदी को एक टेलीफ़ोन कॉल भी किया, इसके तुरंत बाद घोषित नतीजों में बीजेपी को 300 सीटें दिखाई जाने लगीं.
प्रधानमंत्री ओली की विदेश नीति के सलाहकार राजन भट्टाराई ओली के अनुसार, ओली की मोदी से बातचीत में दोनों नेताओं ने दोनों पड़ोसियों के बीच मौजूद वर्षों पुराने संबंधों को सुधारने के लिए मिलकर काम करने की उम्मीद जताई.
2014 में जब नरेंद्र मोदी ने नेपाल दौरे में नेपाली संसद में अपने संबोधन से कईयों के दिलों-दिमाग़ को जीत लिया था. लेकिन इसके बाद नेपाल में आंतरिक संघर्षों के बाद 2015 में नए संविधान को लागू करने की बारी आई तो भारत के रुख़ का नेपाल में विरोध हुआ.
भारत की तरफ़ से नेपाल सीमा पर अघोषित नाकेबंदी की गई तो दोनों देशों के बीच संबंधों में तेज़ी से गिरावट आई.
हालांकि, कुछ दिन पहले राजन भट्टाराई ने कहा था कि दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत के बाद द्विपक्षीय लेन-देन में भी सुधार हो रहा है.
उन्होंने बीबीसी नेपाली से कहा, "अब संबंध सुधर रहे हैं और शुक्रवार को मोदी और ओली के बीच टेलीफ़ोन पर हुई बातचीत के दौरान, दोनों पक्षों ने संबंधों में सुधार लाने और उसे नई ऊंचाइयों पर ले जाने पर अपनी सहमति व्यक्त की."
पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला की बेटी और खुद उप-प्रधानमंत्री रह चुकीं विपक्षी नेपाली कांग्रेस की नेता सुजाता कोइराला ने भी मोदी के दोबारा चुने जाने पर खुशी जताई.
उन्होंने बीबीसी नेपाली से कहा, "मुझे बहुत उम्मीद थी कि मोदी दोबारा सत्ता में लौट आएंगे. मेरा अपना मानना है कि वो बहुत गतिशील हैं. वह निश्चित रूप से हमारे सदियों पुराने संबंधों को सुधारने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे."
देशसंचार डॉटकॉम के संपादक और भारतीय मीडिया में काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार युबराज घिमिरे ने उम्मीद जताई कि मोदी अपनी सुधार योजनाओं को और ज़्यादा तेज़ करने के लिए अपने मंत्रियों और नौकरशाही दोनों का पुनर्गठन करेंगे.
घिमरे कहते हैं, "इसमें नेपाल सहित सभी दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के साथ संबंधों को सुधारना भी शामिल होगा, जहां भारत को लगता है कि चीन अपनी पैठ बना रहा है."
यह सुनिश्चित करने के लिए वह कड़ी मेहनत करेंगे कि सभी पड़ोसियों के साथ भारत के संबंध सौहार्दपूर्ण और मजबूत हों. हालांकि पाकिस्तान के साथ भारत का रिश्ता बिल्कुल ही अलग है. यहां पूरी तरह से अलग शर्तों पर भारत चलेगा."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले प्रचंड बहुमत पर सोशल मीडिया के जरिये भी नेपाल से मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है. अधिकतर राजनेता उन्हें बधाई दे रहे हैं और उनके दूसरे कार्यकाल की सफलता के लिए शुभकामनाएं भेज रहे हैं.

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